गम्हरिया। क्या जमशेदपुर डेयरी के कर्मचारी रविन्द्र नाथ ठाकुर 59) की मौत पॉयजन से हुई थी। आदित्यपुर थाना क्षेत्र के जमशेदपुर डेयरी के कर्मचारी ठाकुर की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने कंपनी प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है। वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों में डेयरी प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश भड़क उठा है। राजद के वरीय नेता अर्जुन यादव ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मृतक की पत्नी तारा देवी ने आदित्यपुर थाना पुलिस को दिए आवेदन में प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाई है। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी कई मामले में जमशेदपुर डेयरी प्रबंधन की मजदूर विरोधी नीति उजागर होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहा कि डियुटी के समय ही रवीन्द्र ठाकुर की तबीयत खराब हो गई थी। यदि उन्हें सीधे अस्पताल तुरंत भेजा जाता तो जान बच सकती थी। डेयरी प्रबंधन ने इस मामले में मानवता की सभी हदें पार कर दी। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी कई ठेकाकर्मी की मृत्यु सुधा डेयरी प्रबंधन की प्रताड़ना, लापरवाही एवं निष्क्रियता से हो चुकी है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव अर्जुन प्रसाद यादव ने इस मामले को संवेदनशील बताते हुए सरकार से जमशेगपुर डेयरी ठेकाकर्मी रवीन्द्र ठाकुर की मृत्यु का उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग के साथ उचित मुआवजा देने एवं परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने की मांग की है।
टीएमएच में इलाज के दौरान जहर की हुई पुष्टि
पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि टीएमएच के चिकित्सकों ने इलाज के दौरान शरीर में जहर होने की पुष्टि की है। उन्होंने इस सनसनीखेज मामले में जमशेदपुर डेयरी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। इस आवेदन की प्रतिलिपि जमशेदपुर डेयरी प्रबंधन को भी दी गई है।
क्या है मामला
परिजनों के अनुसार मृतक ग़म्हरिया के जगन्नाथपुर निवासी सत्यनारायण ठाकुर (59 वर्ष) जमशेदपुर डेयरी में करीब 30 वर्षों से कार्यरत थे। बताया गया कि 17 जून को ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर डेयरी के दो कर्मचारियों ने उसे घर पहुंचा दिया। उसके बाद परिजनों की ओर से उसे इलाज के लिए ईएसआई हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे टीएमएच रेफर कर दिया गया। वहां चिकित्सकों ने शरीर में जहर का प्रभाव बताया एवं स्थिति में सुधार नहीं होने पर बेहतर इलाज के लिए उसे रांची के रिम्स ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि समय पर समुचित इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी स्थिति बिगड़ती गई और अंततः 21 जून को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पत्नी ने पुलिस को दिए आवेदन में यह भी बताया है कि पति ने मरने से पूर्व डेयरी के चार अधिकारियों का नाम बताया है, जिसका ऑडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित है।
मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग परिजनों ने कहा कि यदि समय रहते बेहतर इलाज की व्यवस्था की जाती तो संभव है कि उनकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने मामले में कंपनी प्रबंधन से भी जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी और मुआवजे की मांग की है। इस मामले को लेकर डेयरी प्रबंधन के अधिकारियों से मृतक के परिजनों के साथ सोमवार को वार्ता की तिथि मुक़र्रर की गई है।

