गम्हरिया। स्वर्णरेखा नदी क्षेत्र में अतिक्रमण, औद्योगिक स्लैग व कचरा डंपिंग तथा नदी के प्रवाह क्षेत्र से जुड़े मामलों में समान और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की गई है। जमशेदपुर के मजदूर नेता सह जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार शर्मा ने जिला प्रशासन, राज्य सरकार, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) समेत संबंधित अधिकारियों को जनहित से जुड़े इस प्रमुख मुद्दे को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में एनजीटी का हवाला देते हुए नदी के रिवर बेड और पर्यावरण से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने 23 अगस्त 2024 और 28 जुलाई 2025 के एनजीटी आदेशों का उल्लेख करते हुए नदी क्षेत्र की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। शिकायत में बताया गया है कि यदि नदी क्षेत्र अथवा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की जांच हो रही है, तो इसका दायरा केवल गरीब बस्तियों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नदी के दोनों किनारों पर स्थित बड़े औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत परिसरों की भी समान मापदंड पर जांच होनी चाहिए। शिकायत में नदी के वास्तविक रिवर बेड, फ्लड प्लेन, पुराने प्रवाह क्षेत्र और सरकारी भूमि की पहचान के लिए स्वतंत्र वैज्ञानिक एवं राजस्व सर्वेक्षण कराने की मांग की गई है। मकानों पर कार्रवाई से पहले सुनवाई की मांग शिकायत में यह उल्लेख किया गया है कि क्या एनजीटी के आदेश में किसी विशिष्ट बस्ती या नागरिक के मकान को स्वत: ध्वस्त करने का निर्देश है। किसी मकान पर कार्रवाई से पहले भूखंड की पहचान, सीमांकन, राजस्व रिकॉर्ड की जांच और प्रभावित व्यक्ति को आपत्ति दर्ज कराने व सुनवाई का अवसर देने की मांग की गई है। औद्योगिक प्रतिष्ठानों के दस्तावेज जांचने की मांग नदी किनारे स्थित औद्योगिक प्रतिष्ठानों के स्लैग या अपशिष्ट डंपिंग की भी जांच की मांग की गई है। इसके तहत पर्यावरणीय अनुमति, (कंसेंट टू ऑपरेट), कचरा निस्तारण रिकॉर्ड और भूमि संबंधी दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है। शिकायत में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के कार्यालय से 30 अगस्त 2023 को भेजे गए पत्र या शिकायत की प्रमाणित प्रति सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है। साथ ही प्रशासन से उठाए गए सभी 20 सवालों का बिंदुवार जवाब, जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और छोटे-बड़े सभी कथित अतिक्रमणों पर समान कार्रवाई की मांग की गई है।