गम्हरिया। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र, सरायकेला-खरसावां में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से किसानों को बचाने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के 60 से अधिक प्रगतिशील किसान एवं महिला किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.सी. दूबे ने ऑनलाइन माध्यम से किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है और वर्षा की अनिश्चितता बढ़ रही है। ऐसे समय में किसानों को कम अवधि एवं कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती अपनाने की आवश्यकता है। इससे उत्पादन के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। निदेशक ( प्रसार शिक्षा) डा. डीके साही ने कहा कि किसानों तक जानकारी पहुंचाना विश्व विद्यालय की प्राथमिकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. पंकज सेठ ने किसानों को कम अवधि वाली धान एवं अन्य फसलों की उन्नत किस्मों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धान की सीधी बुआई, जल संरक्षण, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली जैसी तकनीकें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में कारगर साबित हो रही हैं। साथ ही किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने की अपील की। वैज्ञानिकों ने आकस्मिक फसल योजना की जानकारी देते हुए कहा कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में किसान वैकल्पिक एवं कम अवधि वाली फसलों का चयन कर नुकसान को कम कर सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान किसानों की विभिन्न समस्याओं का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा किया गया। इस अवसर पर वैज्ञानिक रश्मिका हांसदा ने जलवायु परिवर्तन के अनुरूप मड़ुआ, अरहर तथा धान की उन्नत किस्मों, विशेष रूप से डीआरआर धान-320 सहित अन्य अनुशंसित किस्मों की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें बदलते मौसम के अनुरूप खेती की नई तकनीकों की जानकारी मिली, जिसे वे अपने खेतों में अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। इस अवसर पर वैज्ञानिक सिमरन कुमारी, जी मार्डी, लक्की उरांव, सुशील पूर्ति, विनोद तिर्की, चैतन्य मुर्मू आदि उपस्थित थे।
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जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने के लिए किसानों को दी गई आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र, सरायकेला-खरसावां में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से किसानों को बचाने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
लेखक: संवाददाता · 8 जुलाई 2026
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